यह शर्म नहीं गर्व का विषय है

विष्णु पुराण में भी अजमीढ़ वंश की चर्चा है। कौरवो के पुरखे राजा कुरु जिसे ईरान के इतिहास में कुरेश कहा गया है, का साम्राज्य ईरान से सिंधु तक था।

New Delhi, Feb 10 : बाबा रामदेव ने कहा कि मुसलमान भी भगवान राम के वंशज हैं तो ओवैसी भड़क गए । रामदेव ने कोई गलत बात नही की है।
अगर ईरान और भारत के इतिहास पर नजर डाले तो अजमीढ़ वंश की चर्चा है। विष्णु पुराण में भी अजमीढ़ वंश की चर्चा है। कौरवो के पुरखे राजा कुरु जिसे ईरान के इतिहास में कुरेश कहा गया है, का साम्राज्य ईरान से सिंधु तक था। कुरुक्षेत्र उनका मुख्य भूमि था ।

संभवतः इंद्रप्रस्थ उनकी राजधानी थी। कुरु के राज्य का विस्तार कहाँ तक रहा होगा यह खोज का विषय है लेकिन विश्व इतिहास में कुरु प्राचीन विश्व के सर्वाधिक विशाल साम्राज्य को नए आयाम देने वाला चक्रवर्ती राजा था जिसने ईरान में मेड साम्राज्य को अपने ही नाना अस्त्यागस से हस्तांतरित करते हुए साम्राज्य का नया नाम अजमीढ़ साम्राज्य रखा था। इस साम्राज्य की सीमायें भारत से मिश्र, लीबिया और ग्रीक तक फ़ैली हुई थी।अजमीढ़ साम्राज्य, उस समय तक के विश्व का शायद सबसे बड़ा साम्राज्य था। इसकी महानता का गुणगान यूनानी ग्रंथों में भी मिलता है।

सन् 1971 में ईरान के शाह ने अजमीढ़ साम्राज्य स्थापित होने के 2500 वर्ष पूरे होने पर एक विशेष आयोजन किया था। अजमीढ़ साम्राज्य का ही असर था कि मक्का और अरब में 360 मूर्तियां इस्लाम के पहले स्थापित थी । जब मुहम्मद साहब ने मूर्तिपूजा का विरोध किया तो वहां के लोगो ने इसका कड़ा विरोध किया जिसके कारण मुहम्मद साहब को मदीना जाना पड़ा ।बाद में अपने अनुयायियों के साथ मुहम्मद साहब ने मक्का पर कब्जा किया । शुक्राचार्य हो या कुरेश उर्फ कुरु इन्होंने हिदू धर्म के अवतारों को माना । उन्होंने राम को अपना पूर्वज माना ।असुरो के गुरु शुक्राचार्य भी ईरान के इलाकों में रहे और असुरो का राज स्थापित करवाया था। ईरान में उस समय हिन्दुओ , जिसे लोग सनातन कहते हैं, के ही तरह कर्मकांड हुआ करते थे। मूर्तिपूजा होती थी सूर्य ,अग्नि , सोम आराध्य थे।ईरान से माइग्रेट हुआ पारसी समुदाय आज भी अग्नि और सूर्य का उपासक है। महात्मा जरथरुस्त ने भी खाड़ी देशों में हिन्दू धर्म को ही आगे बढ़ाया था । सीधे सीधे तौर पर कहा जाय तो इस्लाम के पूर्व यहूदी और ईसाई से भी पहले हिन्दू धर्म खाड़ी तक फैला हुआ था। इस्लाम की जहा पर स्थापना हुई वहां के बाशिंदे भी हिन्दू धर्म के अनुयायी थे । अब कल को कोई कहे कि हिन्दू धर्म से छिटककर ही सिख , जैन और बौद्ध धर्म बने है तो इसमें गलत क्या है ? उसी तरह मुसलमान के पूर्वज राम को अपना पूर्वज मानते थे तो इसमें अतिशयोक्ति कहाँ है ?

ओवैसी तो वैसे भी कुलकलंकी है। जिसके बाप दादा अंग्रेजो के साथ रहे ,जिसके पूर्वज भारत के अस्तित्व को ही नकारते रहे , खुद ओवैसी ने मातृभूमि को वंदना करने से इनकार कर दिया उससे समझदारी की उम्मीद कहाँ । पता किया जाना चाहिए कि ओवैसी की रगों में किसका खून दौड़ रहा है ? भारतीय मुसलमानों को इस बात पर गर्व महसूस करना चाहिए कि वे उस समृद्ध सभ्यता के वारिस हैं जिसके सामने कोई दूसरा नही टिकता । मीडिया ,खासतौर पर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया ऐसे मूर्ख कुलकलंकी को अहमियत नहीं दे तभी ऐसे चिरकुट नेता हाशिये से बाहर रहेंगे।

(वरिष्ठ पत्रकार योगेश किसलय के फेसबुक वॉल से साभार, ये लेखक के निजी विचार हैं)