नागेश्वर राव ने किसके कहने पर शर्मा का तबादला किया, यह सवाल अनुत्तरित रह गया

पहले तो सरकार ने मामले को दबाने का प्रयास किया, लेकिन जब कोर्ट में CBI जांच के लिए याचिका दी गई तो बाध्य होकर सरकार को घोषणा करनी पड़ी।

New Delhi, Feb 12 : सुप्रीम कोर्ट ने CBI के सीनियर अधिकारी नागेश्वर राव को अवमानना के मामले में पूरे दिन कोर्ट में बैठने की सजा सुनाई है। साथ ही एक लाख का जुर्माना भी लगाया है।
दरअसल राव ने CBI के कार्यकारी चीफ के रुप में मुजफ्फरपुर बालिका गृह यौन प्रताड़ना कांड की जांच कर रही CBI टीम के लीडर ए के शर्मा का तबादला कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने जांच पूरी होने तक जांच टीम के अधिकारियों का तबादला करने से मना कर रखा था। इसके बावजूद राव ने मुजफ्फरपुर से यूपी तबादला कर दिया था। इसपर अवमानना याचिका दायर की गई थी।
कोर्ट का यह निर्णय राजनेताओं के चाकर बने अधिकारियों के लिए एक सबक है। यह मील का पत्थर साबित होगा।

मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड बिहार सरकार पर एक स्याह काला धब्बा है। यह उसके गले की हड्डी बन गई हैं। क्योंकि बालिका गृह का संचालक बिहार सरकार का लाडला था। सरकार ने उसे और उसके परिजनों को करीब एक दर्जन कमिटियों में मनोनीत कर रखा था। चार साल के अंदर उसे 4 करोड़ से अधिक का सरकारी फंड दिया गया था। बालिका गृह के काले कारनामों की सोशल आडिट रिपोर्ट आने के बाद भी समाज कल्याण विभाग ने उसे नया काम सौंपा था। इतना दबदबा था ब्रजेश ठाकुर का। यह दबदबा बिहार सरकार की कृपा से बना था। प्रायः सभी दलों के शीर्ष नेताओं का उसके मुजफ्फरपुर आवास पर आना जाना था। सरकार के बड़े लोगों के साथ उसकी तस्वीरें थीं।

पहले तो सरकार ने मामले को दबाने का प्रयास किया, लेकिन जब कोर्ट में CBI जांच के लिए याचिका दी गई तो बाध्य होकर सरकार को घोषणा करनी पड़ी। जिस दिन जांच CBI को देने की घोषणा के बाद मुजफ्फरपुर के वरीय पुलिस अधिकारी बालिका गृह गये और ब्रजेश के साथ राज्य के शीर्ष नेता के वहां टंगे फोटो उखाड़ लाये। जाहिर है तस्वीरें किसी के कहने पर ही हटाई गई होंगी। ठीक इसी तरह नागेश्वर राव ने CBI के जांच अधिकारी का तबादला किसी के कहने पर ही किया होगा। जिसका सुप्रीम कोर्ट ने संज्ञान लिया और उन्हें दंडित किया। इसके पहले इस मामले में सख्ती बरत रही मुजफ्फरपुर की महिला SSP का भी तबादला कर दिया गया था। इसी क्रम में पटना हाईकोर्ट ने जांच की खबरों के प्रसारण-प्रकाशन पर रोक लगाने का बेतुका आदेश दे दिया। जिसे बाद में सुप्रीम कोर्ट ने हटाया।

यानी हर स्तर पर जांच को दबाने-प्रभावित करने की कोशिश की गई। शायद सुप्रीम कोर्ट के ध्यान में ये सभी बातें होगी, तभी कोर्ट ने नागेश्वर राव को क्षमा याचना के बाद भी दंडित किया। इसके माध्यम से अदालत ने यह संदेश दिया है कि अत्याचारी और उसे संरक्षण देनेवाले सत्ता का सहारा लेकर बच नहीं सकते। बदले गये CBI के जांच अधिकारी शर्मा ब्रजेश को संरक्षण देनेवाले नेताओं पर भी फंदा कसने की कोशिश में थे। इसकी भनक लगते ही वे हटा दिये गए। हटाने का माध्यम बने नागेश्वर राव। नागेश्वर ने किसके कहने पर शर्मा का तबादला किया, यह सवाल अनुत्तरित रह गया। सुप्रीम कोर्ट को इसका भी जवाब लेना चाहिये।
कोर्ट के इस फैसले का स्वागत किया जाना चाहिए।

(वरिष्ठ पत्रकार प्रवीण बागी के फेसबुक वॉल से साभार, ये लेखक के निजी विचार हैं)