बीजेपी के टिकट पर मजदूर का बेटा बना विधायक, कहा मां-बाप को तो MLA का मतलब भी नहीं पता, वीडियो

राम सतपुते ने कहा कि मैं दो तीन साल से उस इलाके में काम कर रहा था, मेरे पिताजी को तो कुछ भी नहीं पता था, उन्हें तो ये भी नहीं पता कि विधायक क्या होता है।

New Delhi, Oct 30 : बीजेपी ने महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में एक मजदूर के बेटे को टिकट दिया था, जो चुनाव जीतकर विधायक बन चुके हैं, मीडिया से बातचीत करते हुए राम सतपुते ने कहा कि ये मेरे लिये बहुत खुशी का बात है, ये मेरे लिये वैसे ही है, जैसे अभी कुछ दिन पहले ही एक फिल्म आई थी सुपर थर्टी, जिसमें कहा गया था कि राजा का बेटा राजा नहीं होगा, जो असली हकदार होगा, वही राजा बनेगा।

पिता चीनी मिल में मजदूर
आपको बता दें कि मालशिरस सीट से विधानसभा चुनाव जीतने वाले राम सतपुते के पिता विठ्ठल सतपुते चीनी मिल में मजदूरी करते थे, राम सतपुते लंबे समय तक अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में सक्रिय रहे हैं, उन्हें सीएम देवेन्द्र फडण्वीस का करीबी माना जाता है, उन्होने ही इस चुनाव में उन्हें टिकट दिलवाया था।

पिता को कुछ नहीं पता
राम सतपुते ने कहा कि मैं दो तीन साल से उस इलाके में काम कर रहा था, मेरे पिताजी को तो कुछ भी नहीं पता था, उन्हें तो ये भी नहीं पता कि विधायक क्या होता है, उन्हें लगता था कि लोग घर पर आते हैं मिलते हैं, तो बेटा कुछ अच्छा ही कर रहा है, मेरे जैसे गरीब और पिछड़ समाज से आये लोगों को सीएम महोदय और अठावले साहब ने जो क्षमता देने का काम किया है, वो मैं कभी नहीं भूल सकता।

एबीवीपी और युवा मोर्चा में कर चुके हैं काम
इंजीनियरिंग की पढाई करने वाले राम सतपुते अष्टी इलाके के रहने वाले हैं, पढाई के दिनों से ही राजनीति में सक्रिय राम सतपुते को एबीवीपी ने प्रदेश मंत्री बनाया था, बाद में भारतीय जनता युवा मोर्चा में भी प्रदेश उपाध्यक्ष बने, छात्रहित के लिये एबीवीपी द्वारा किये गये कई प्रदर्शन और आंदोलन में उनकी बड़ी भूमिका रही।

अठावले ने खुशी से स्वीकार किया नाम
आपको बता दें कि विधानसभा चुनाव में गठबंधन में मालशिरस सीट रामदास अठावले की पार्टी आरपीआई के हिस्से में थी, लेकिन राम सतपुते के नाम पर उन्होने कोई आपत्ति नहीं जताई, उन्होने खुशी-खुशी सतपुते की उम्मीदवारी के बाद अपने उम्मीदवार का नाम वापस ले लिया।