मिसाल: जिस दफ्तर में पिता थे चपरासी बिटिया वहीं बनी ‘जज’, कड़ी मेहनत से पूरा किया ये सपना  

शादी के बाद लगा कि अब वो जज बनने का सपना पूरा नहीं कर पाएंगी । लेकिन किस्मत को तो कुछ और ही मंजूर था । अर्चना पुणे विश्वविद्यालय पहुंची और उन्होंने अपनी एलएलबी की पढ़ाई पूरी की ।

New Delhi, Dec 05: देश के एक छोटे से हिस्‍से में जहां एक चपरासी की बेटी के लिए ऊंची उड़ान के सपने देखना भी मुहाल था उसने अपनी मेहनत के दम से वो कर दिखाया जिसने आज पिता का माथा गर्व से ऊंचा कर दिया है । अर्चना नाम की इस बेटी के पिता सारण जिले के सोनपुर में व्यवहार न्यायालय में चपरासी के पद पर काम करते थे, अब उनकी बेटी का बिहार न्यायिक सेवा प्रतियोगिता में चयन हुआ है ।

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पिता थे चपरासी, बेटी बन गई जज
अपने पिता के साथ एक छोटे से झोपड़ीनुमा घर में रहने वाली अर्चना ने जज बनने का सपना वहीं   देखा । उसने अपनी कड़ी मेहनत से ना सिर्फ खुली आंख से देखे उस सपने को पूरा किया बल्कि ये भी बता दिया कि मन में कुछ ठान लो तो आसमान में सुराख बनाना भी मुश्किल नहीं । पटना के कंकड़बाग की रहनेवाली अर्चना का बिहार न्यायिक सेवा प्रतियोगिता में चयन हुआ है ।

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शादी के बाद भी सपने को छोड़ा नहीं
एक साधारण से परिवार में जन्मी, पली-बढ़ी अर्चना ने पटना विश्वविद्यालय से अपनी उच्च शिक्षा पूरी की । इसके बाद उन्‍होने शास्त्री नगर राजकीय उच्च विद्यालय में छात्रों को कंप्यूटर भी पढ़ाया । अर्चना का विवाह भी हो गया था, शादी के बाद लगा कि अब वो जज बनने का सपना पूरा नहीं कर पाएंगी । लेकिन किस्मत को तो कुछ और ही मंजूर था । अर्चना पुणे विश्वविद्यालय पहुंची और उन्होंने अपनी एलएलबी की पढ़ाई पूरी की ।

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पिता का काम देखकर लगन और बढ़ी
अर्चना ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि बतौर चपरासी पिता जब रोज किसी जज का टहल करते थे तो उन्हें बिल्कुल पसंद नहीं आता था । अर्चना ये भी कहतीं कि शायद उसी का नतीजा हैं कि उन्होंने जज बनने की ठान ली और बनकर दिखाया । उन्‍होने कहा कि शादी के बाद उनके पति राजीव रंजन ने हर मोड़ पर उनका साथ दिया । पिता की मौत के बाद उनकी मां ने अर्चना को हमेशा आगे बढ़ते रहने के लिए प्रेरित किया । अर्चना अपनी सफलता का श्रेय अपने दोनों परिवारों को देती है, और उनका शुक्रिया भी अदा करती हैं ।