चुनावी साल में मोदी कैबिनेट में शामिल होगी जदयू? ललन सिंह के बयान के बाद चढा सियासी पारा

नीतीश कुमार के लिये चुनावी साल में जातिय समीकरण को साधने की चुनौती है, मंत्रिमंडल में किस जाति को जगह दें या नहीं दें, ये आसान नहीं रहने वाला।

New Delhi, Jan 05 : बिहार में इसी साल सितंबर-अक्टूबर में विधानसभा चुनाव होने हैं, तमाम सियासी दल तैयारियों में जुटी हुई है, लेकिन इस बीच सियासी गलियारों में एक चर्चा तेज हो गई है कि क्या जदयू मोदी मंत्रिमंडल में शामिल हो सकती है, इस चर्चा के गर्म होने के बाद बिहार की सियासत में हलचल तेज हो गई है, जदयू से सवाल पूछे जा रहे हैं, हालांकि कोई भी नेता इस पर खुलकर कुछ भी बोलने के लिये तैयार नहीं है।

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ललन सिंह ने दिया जवाब
मुंगेर सांसद और जदयू संसदीय दल के नेता ललन सिंह ने इस पर कहा कि ये प्रधानमंत्री का विशेषाधिकार है, लेकिन तय नीतीश कुमार ही करेंगे, ललन सिंह ने ये भी साफ कहा कि इस समय मुद्दे को बेवजह तूल दिया जा रहा है, ललन सिंह ने तस्वीर साफ करने की भले कोशिश की हो, लेकिन जदयू के लिये मोदी सरकार में शामिल होना इतना आसान नहीं होने जा रहा, क्योंकि कुछ ऐसी समस्याएं हैं, जिससे पार पाना जदयू के लिये आसान नहीं है।

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जदयू के सामने समस्याएं
नीतीश कुमार के लिये चुनावी साल में जातिय समीकरण को साधने की चुनौती है, मंत्रिमंडल में किस जाति को जगह दें या नहीं दें, ये आसान नहीं रहने वाला, दूसरी बात ये कि लोकसभा चुनाव के दौरान नीतीश ने अति पिछड़ा कुशवाहा और दलित कार्ड खेला था, इसलिये मंत्रिमंडल विस्तार में भी इन तबकों का ख्याल रखना होगा। तीसरी बात ये है कि नीतीश के खासमखास कहे जाने वाले आरसीपी सिंह और ललन सिंह के साथ संतोष कुशवाहा के नाम की भी चर्चा है, लेकिन किसी एक को पद मिला, तो दूसरा नाराज होगा, इससे नीतीश की सोशल इंजीनियरिंग पर असर पड़ सकता है।

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सीटों का बंटवारा
बिहार विधानसभा चुनाव के लिये एनडीए में अभी सीटों का बंटवारा तय नहीं हुआ है, इसलिये जब तक ये तस्वीर साफ नहीं होती, जदयू के लिये मोदी सरकार में शामिल होना मुश्किल हो सकता है, साथ ही एनआरसी समेत कुछ ऐसे फैसले हैं, जिसका जदयू विरोध कर रही है, इसलिये सुशासन बाबू फिलहाल अपने पत्ते नहीं खोल रहे हैं।