सीएम केजरीवाल ने एनसीआर में रहने वालों को भी एहसास करा दिया, कि ‘दिल्ली दूर है’

दिल्ली से नोयडा जाने वाले रास्ते कई किलोमीटर जाम में हैं। गुरुग्राम और गाज़ियाबाद के रास्तों पर भी गाड़ियां फंसी हैं।

New Delhi, Jun 02 : दिल्ली और उसके आसपास अजब संकट खड़ा हो गया है । अभी तक दिल्ली से सटे उत्तर प्रदेश और हरियाणा की सीमाओं को वहां की राज्य सरकारों ने सील किया हुआ था लेकिन आज दिल्ली के मुख्यमंत्री ने भी उत्तर प्रदेश या हरियाणा से लोगों के दिल्ली के प्रवेश पर पाबंदी लगा दी । यदि पूरे मसले को देखें तो स्पष्ट हो जाता है कि यह कोई 35 साल पहले कल्पना किए गए “राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र” परियोजना के असफल होने का एक नमूना है ।

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दिल्ली अपने आप में एक शहर तो है लेकिन उससे सटे गुड़गांव फरीदाबाद नोएडा और ग्रेटर नोएडा भी गाजियाबाद और उधर बहादुरगढ़ यह सभी आबादी के लिहाज से दिल्ली से बहुत करीबी से जुड़े हुए हैं । गाजियाबाद या नोएडा की अधिकांश आबादी नौकरी करने के लिए दिल्ली आती है, बहुत सारी आबादी दिल्ली पार करके गुड़गांव भी जाती है । यही हाल फरीदाबाद का भी है।
एक तरफ तो लॉक डाउन खोला जा रहा है और दूसरी तरफ लोगों के आवागमन को राज्यों की सीमा के आधार पर पाबंद किया जा रहा है। यह बहुत विचित्र है । होना तो यह था कि कोरोना जैसे संकट के लिए राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की एक एकीकृत या यूनिफाइड योजना बनती, जिसमें राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में शामिल सभी जिलों के लोगों के आवागमन, स्वास्थ्य परीक्षण, व्यापार, रोजगार आदि की योजना एक साथ मिलकर बनाई जाती ।

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अभी दिल्ली से नोयडा जाने वाले रास्ते कई किलोमीटर जाम में हैं। गुरुग्राम और गाज़ियाबाद के रास्तों पर भी गाड़ियां फंसी हैं। दुखद है राजधानी क्षेत्र यानी नेशनल कैपिटल रीजन (NCR) न सिर्फ देश का सबसे बड़ा कैपिटल रीजन है, बल्कि इसे दुनिया के बड़े कैपिटल रीजन में गिने जाने का गर्व है. एनसीआर में 4 करोड़ 70 से ज्यादा आबादी रहती है. एनसीआर में दिल्ली से सटे सूबे उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान के कई शहर शामिल हैं. इन राज्यों के ये शहर जुड़कर दिल्ली को न सिर्फ हसीन और जीवंत बनाते हैं, बल्कि रोजगार से लेकर व्यापार, बल्कि शैक्षनिक और सांस्कृतिक तौर पर भी एक नई दुनिया आबाद करने का मौका देते हैं.

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लेकिन करोना जैसी बीमारी ने इस समग्र क्षेत्र को, जिसे देश में विकास- प्रगति का मानक कहा जाता है, को छिन्न-भिन्न कर दिया है। लोगों को एहसास करा दिया है कि वह भले ही एनसीआर में रहते हैं लेकिन उनसे दिल्ली बहुत दूर है।

(वरिष्ठ पत्रकार पंकज चतुर्वेदी के फेसबुक वॉल से साभार, ये लेखक के निजी विचार हैं)