ये 4 M क्या है, जिसके बूते ममता बनर्जी ने बीजेपी बिग्रेड को कर दिया चित, जानिये

इस चुनाव के शुरुआती परिणाम बता रहे हैं कि चार एम यानी ममता, मुस्लिम, मतुआ और महिला टीएमसी के साथ खड़ी नजर आ रही हैं, वहीं बीजेपी को सिर्फ एक एम यानी मोदी का ही प्रभाव काम आया।

New Delhi, May 02 : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के परिणाम लगभग सामने आ चुके हैं, इस चुनाव में फाइव एम फैक्टर ने बढ-चढकर अपना रंग दिखाया, बीजेपी तथा टीएमसी के नजर इन पांच एम पर थी, जहां बीजेपी मोदी और मतुआ के सहारे फतह करने की तैयारी में थी, तो वहीं टीएमसी ममता, महिला और मुस्लिम के सहारे तीसरी बार सत्ता में वापस लौटी, एम फैक्टर का ही प्रभाव है कि आज ममता दीदी तीसरी बार सत्ता में वापसी करती दिख रही हैं। कांग्रेस, लेफ्ट और आईएसएफ गठबंधन के बावजूद मुस्लिम मतदाताओं ने ममता का साथ दिया, वहीं दूसरी ओर एम फैक्टर का ही नतीजा है कि 5 साल पहले तक जिस बीजेपी की तीन सीट थी, वो इस चुनाव में 80 के आस-पास पहुंचती दिख रही हैं, इस चुनाव के शुरुआती परिणाम बता रहे हैं कि चार एम यानी ममता, मुस्लिम, मतुआ और महिला टीएमसी के साथ खड़ी नजर आ रही हैं, वहीं बीजेपी को सिर्फ एक एम यानी मोदी का ही प्रभाव काम आया।

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4 एम टीएमसी के साथ
पश्चिम बंगाल में मतुआ जाति के करीब 30 लाख लोग रहते हैं, बांग्लादेश सीमा से सटे नादिया, उत्तर तथा दक्षिण 24 परगना की 4 लोकसभा सीटों तथा करीब 30 से 40 विधानसभा सीटों के नतीजों को इस समुदाय के लोग प्रभावित करते हैं, इन सीटों पर 6ठें चरण में यानी 22 अप्रैल को वोट डाला गया था, मतुआ समुदाय पश्चिम बंगाल की अनुसूचित जाति की आबादी का बड़ा हिस्सा है, Prashant-Kishor-Mamata-banerjee (1) ये समुदाय साल 1950 से ही पहले पूर्वी पाकिस्तान और अब बांग्लादेश से पश्चिम बंगाल में पलायन कर रहा था, ऐसा माना जा रहा है कि इसकी बड़ी वजह धार्मिक आधार पर उत्पीड़न रहा है, इस चुनाव में बीजेपी ने भरोसा दिया था कि अगर बीजेपी सत्ता में वापसी करती है, तो इन समुदाय को सीएए और एनआरसी से अलग रखा जाएगा, लेकिन शुरुआती रुझान र नतीजों से लग रहा है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में बीजेपी का दांव कारगर नहीं साबित हुआ, इस समुदाय के लोगों ने टीएमसी के पक्ष में बढ-चढ कर वोट किया।

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मुस्लिम वोटर
अगर मुस्लिम वोटरों की बात करें, तो इस बार भी मुस्लिम वोटरों की चाबी ममता दीदी के हाथ में ही रही, बंगाल में बीते एक दशक से मुस्लिम वोटर ममता के साथ रहे हैं, इस बार मुस्लिम वोटरों को लुभाने के लिये लेफ्ट फ्रंट और कांग्रेस ने आईएसएफ जैसे कट्टरपंथी दल के साथ गठजोड़ तो किया है, लेकिन चुनाव नतीजे बता रहे हैं कि इस गठबंधन को मुस्लिम वोटरों ने सिरे से खारिज कर दिया है, ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम को भी इस चुनाव में करारा जवाब मिला है। 294 में से 46 विधानसभा सीटों पर 50 फीसदी से ज्यादा मुस्लिम हैं, 16 से 20 सीटें ऐसी है, जहां मुसलमानों की आबादी 40 फीसदी से ज्यादा है, 30 से 35  सीटों पर 30 फीसदी मुस्लिम वोटर हैं, 50 सीटों पर 25 फीसदी से ज्यादा मुस्लिम हैं, यानी 120 से 140 सीटें ऐसी है, जहां पर मुस्लिम मतदाता महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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बीजेपी के दावे की निकली हवा
बंगाल में बीजेपी एक दिन पहले तक 200 सीटों का आंकड़ा पार करने का दावा कर रही थी, खासकर चुनाव से ठीक पहले बीजेपी की नजर ओबीसी वोट पर थी, इसी को ध्यान में रखकर बीजेपी ने टिकट बंटवारे के साथ-साथ चुनाव प्रचार की रणनीति भी बनाई थी, खासकर मतुआ जाति को साधने के लिये बीजेपी ने बड़ा दांव खेला था, mamta amit बीजेपी ने मतुआ समुदाय के लोगों को भी बढ-चढ कर टिकट दिया था, खुद पीएम मोदी इस दौरान बांग्लादेश की यात्रा पर भी गये थे, इस समुदाय के मंदिर में जाकर पूजा अर्चना कर वोट को अपने पक्ष में करने की भरपूर कोशिश की थी, लेकिन ये दांव फेल होता दिख रहा है।