महाराष्ट्र की सियासी लड़ाई दुष्यंत चौटाला तक पहुंची, शिवसेना ने लांघी सीमा

कल शिवसेना प्रमुख बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह से मुलाकात कर सकते हैं, जिसके बाद आगे का फैसला लिया जाएगा।

New Delhi, Oct 29 : महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में भले बीजेपी ने शिवसेना के साथ मिलकर चुनाव लड़ा हो, लेकिन चुनाव नतीजों के बाद शिवसेना ने तेवर दिखाने शुरु कर दिये हैं, शिवसेना राज्य में सत्ता के आधे बंटवारे के साथ ही ढाई साल के लिये सीएम पद की मांग पर अड़ी हुई है, इसी बात को लेकर दोनों सहयोगियों में खींचतान जारी है, सोमवार को दोनों पार्टियों के नेताओं के राज्यपाल से अलग-अलग मुलाकात की, अब शिवसेना सांसद संजय राउत का कहना है कि महाराष्ट्र में किसी दुष्यंत के पिता जेल में नहीं हैं।

बीजेपी पर निशाना
जब शिवसेना प्रवक्ता संजय राउत से सवाल पूछा गया कि बीजेपी के साथ चुनाव पूर्व गठबंधन होने के बावजूद सरकार बनाने में देरी क्यों हो रही है, तो इस उन्होने तंज कसते हुए कहा कि यहां कोई दुष्यंत नहीं है, जिसके पिता जेल में हों, हम सत्य और धर्म की राजनीति करते हैं, शरद पवार जी ने बीजेपी और कांग्रेस के खिलाफ माहौल बनाया, वो कभी भी बीजेपी के साथ नहीं जाएंगे।

राजनीति में कोई साधु-संत नहीं
इससे पहले सोमवार को शिवसेना ने कहा था कि राजनीति में कोई भी साधु-संत नहीं होता, इस बयान से माना जा रहा था कि यदि बीजेपी उनकी मांगों को नहीं मानती है, तो वो कांग्रेस और एनसीपी के समर्थन से सरकार बना सकती है, शिवसेना नेता संजय राउत ने कांग्रेस-एनसीपी के साथ सरकार बनाने की संभावनाओं को खारिज नहीं किया, लेकिन कहा कि शिवसेना गठबंधन की पवित्रता में विश्वास करती है।

बीजेपी का इंतजार करेंगे
संजय राउत ने साफ कहा कि उद्धव ठाकरे ने स्पष्ट कहा है कि हम बीजेपी का इंतजार करेंगे, लेकिन हमें अन्य विकल्प पर विचार करने से ना रोकें, हम इस पाप को नहीं करना चाहते, कांग्रेस-एनसीपी से शिवसेना के समर्थन लेने की संभावनाओं पर सांसद ने कहा कि हम समर्थन लेने की आशंका से मना नहीं कर सकते, राजनीति में कोई साधु-संत नहीं होता है, लेकिन हम सिद्धांतों में विश्वास करते हैं।

कल अमित शाह से मुलाकात
आपको बता दें कि कल शिवसेना प्रमुख बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह से मुलाकात कर सकते हैं, जिसके बाद आगे का फैसला लिया जाएगा, दूसरी ओर कांग्रेस-एनसीपी शिवसेना को अपने खेमे में लेने के लिये सीएम पद तक देने को तैयार है, अब देखना है कि बीजेपी क्या रणनीति अपनाती है।