शिवसेना ने नहीं दिया साथ तो भी फड़नवीस ही होंगे CM, राज्‍यपाल के पास मौजूद हैं ये 3 विकल्‍प

शिवसेना और बीजेपी अपने-अपने रुख पर कायम है, महाराष्‍ट्र में सरकार गठन होती नजर नहीं आ रही है । ऐसी स्थिति में राज्‍यपाल के पास तीन विकल्‍प हैं, जिससे राज्‍य में अगले कुछ दिनों तक शासन मैनेज किया जा सकता है ।

New Delhi, Nov 08: महाराष्‍ट्र में सरकार गठन की सूरत निकलती नजर नहीं आ रही है । ना तो शिवसेना टस से मस होने को तैयार है ना ही बीजेपी की ओर से कोई नया रुख सामने आ रहा है । वहीं दूसरी तरह सरकार बनाने का समय भी खत्‍म होने को है । प्रदेश में इस वक्‍त राज्‍यपाल पर सबकी निगाहें टिकी हैं, बहुमत पेश ना कर पाने की सूरत में उन्‍हें ही फैसला लेना है । क्‍या कुछ हो सकता है ऐसी स्थिति में आइए आगे जानते हैं ।

राज्‍यपाल के पास पहला विकल्‍प
महाराष्ट्र में राज्‍यपाल के पास पहला विकल्‍प है कार्यवाहक मुख्‍यमंत्री का । यानी सरकार ना बनने   की सूरत में देवेन्‍द्र फड़नवीस को ही राज्‍य का कार्यवाहक मुख्‍यमंत्री बनाए रखा जाए । जो नीतिगत फैसले छोड़कर बाकी प्रशासनिक फैसले लेते रहेंगे ।
दूसरा विकल्प
जानकारी के अनुसार दूसरे विकल्‍प के तौर पर राज्यपाल विधानसभा का सत्र बुलाएं । सदन में नेता सदन चुनने का निर्देश दें ।

1998 में किया गया था इस तरह से फैसला
नेता सदन चुनने की ये प्रक्रिया 1998 में भी हुई थी । इस साल उत्तर प्रदेश विधानसभा में, कल्याण सिंह और तत्कालीन मुख्यमंत्री जगदंबिका पाल के बीच वोटिंग के जरिए सदन का नेता और मुख्यमंत्री का चुनाव हुआ था । जिसमें  कल्याण सिंह विजयी रहे थे ।
तीसरा विकल्‍प
वहीं तीसरा विकल्‍प है राष्‍अ्रपति शासन । किसी भी दल के सरकार बनाने में असमर्थ रहने पर राज्यपाल केंद्र को अपनी रिपोर्ट भेजें और उसके बाद विधानसभा को निलंबित कर राष्ट्रपति शासन लगाने की अनुशंसा करें ।

कल दोपहर तक का है वक्‍त
आपको बता दें महाराष्‍ट्र सरकार का कार्यकाल कल दोपहर 12 बजे तक का है । 9 नवंबर दोपहर 12:00 बजे तक, अगर किसी भी राजनीतिक दल ने सरकार बनाने का दावा नहीं किया तो राज्यपाल इन तीन विकल्प में से एक विकल्प को चुन सकते हैं । आपको बता दें शिवसेना ने जहां अपने विधायकों को मुंबई के एक फाइव स्टार होटल में रखा हुआ है, वहीं कांग्रेस ने भी अपने विधायकों की खरीद-फरोख्त के डर से उन्‍हें जयपुर भेज दिया है । बताया जा रहा है कि शिवसेना और बीजेपी में बैक डोर बातचीत चल रही हैं, हालांकि इसका हल निकलता भी नहीं दिख रहा है ।