मुश्किल में वाड्रा, लंदन वाले बंगले की डील हुई डिस्‍क्‍लोज, ईडी का पूछताछ के बाद बड़ा खुलासा

रॉबर्ट वाड्रा इन दिनों ईडी के शिकंजे में हैं, वाड्रा से लगातार पूछताछ की जा रही है । लंदन स्थित बेनामी संपत्ति को लेकर ईडी को अहम सबूत मिले हैं ।

New Delhi, Feb 11 : प्रवर्तन निदेशालय ने दावा किया है कि उन्‍हें राबर्ट वाड्रा की लंदन स्थित बेनामी संपत्ति की खरीद डील को लेकर जानकारी मिल चुकी है । वाड्रा से 3 दिन तक पूछताछ के बाद ईडी के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस बंगले को दलाली के पैसे से खरीदा गया । जिसमें कोरियाई कंपनी सैमसंग इंजीनियरिंग की ओर से पैसा दिया गया । ये दलाली का पैसा गुजरात के दाहेज में ओएनजीसी के एसईजेड से जुड़े निर्माण का ठेका मिलने के बदले दिया गया था । प्रवर्तन निदेशालय अब इस ठेके की जांच कर रहा है।

2008 में मिला था ठेका
दैनिक जागरण की खबर के अनुसार ईडी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि सैमसंग इंजीनियरिंग को दिसंबर, 2008 में दाहेज में बनने वाले एसईजेड के लिए ठेका मिला था । इसके छह महीने के बाद 13 जून, 2009 को सैमसंग ने संजय भंडारी की कंपनी सैनटेक को 49.9 लाख डॉलर (तत्कालीन विनिमय दर के हिसाब से लगभग 23.50 करोड़ रुपये) दिया । संजय भंडारी ने बाद में इसमें से 19 लाख पाउंड (तत्कालीन विनियम दर के हिसाब से लगभग 15 करोड़ रुपये) वोर्टेक्स नाम की कंपनी में ट्रांसफर किया ।

दलाली के पैसे से खरीदा गया लंदन में बंगला
खबर के अनुसार ईडी अधिकरियों ने दावा किया है कि इसी पैसे का इस्तेमाल लंदन के 12, ब्रायंस्टन स्क्वायर की संपत्ति खरीदने के लिए किया गया । 2010 में संजय भंडारी का रिश्तेदार सुमित चड्ढा इस संपत्ति की मरम्मत के लिए वाड्रा को ईमेल भेजकर इजाजत मांग रहा था । इतना ही नहीं, बाद में एक ईमेल में सुमित चड्ढा ने मरम्मत के पैसे की व्यवस्था करने के लिए भी कहा, जिस पर वाड्रा ने जवाब में मनोज अरोड़ा को इसकी व्यवस्था करने का निर्देश देने का भरोसा दिया था । इस घर की मरम्मत पर लगभग 45 लाख रुपये खर्च किए गए।

23 करोड़ रुपये की दलाली दी गई : ईडी
ईडी के वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक सैमसंग इंजीनियरिंग को मिले ठेके और इसके बाद संजय भंडारी को हुए भुगतान की नए सिरे से जांच पड़ताल होगी । इसके लिए संबंधित अधिकारियों को जल्द ही बुलाया जाएगा, उनसे भी पूछताछ होगी । अधिकारी ने बताया कि राबर्ट वाड्रा की लंदन स्थित संपत्ति की ,सारीद डील औश्र इसके लिए जुटाए गए धन की लेन-देने की पूरी चेन का पता चल गया है । अब इसे अदालत में प्रूफ किया जा सके उसके लिए सबूत जुटाए जा रहे हैं । मामले में काफी सुबूत पहले ही जुटाए जा चुके हैं।

बदलना बड़ा एक बड़ा नियम
राबर्ट वाड्रा से पूछताछ के दौरान एक वजह से ईडी को अपना एक पुराना नियम बदलना पड़ा । दरअसल ईडी के नियमानुसार आरोपित से पूदताछ के समय उससे अपना जवाब खुद ही सादे कागज पर लिखने को कहा जाता है । लेकिन पहले ही दिन जब वाड्रा से पूछताछ हुई तो उसकी लिखावट किसी के पल्‍ले नहीं पड़ी । जिसके बाद ईडी ने टाइपिस्‍ट को बुलवाया और वाड्रा का बयान टाइप करके रिकॉर्ड के लिए रखा गया । अब वाड्रा बोलकर अपना बयान लिखाते हैं और टाइपिस्ट टाइप करने के बाद उसका प्रिंट निकालकर वाड्रा को दिखाता है। इसके बाद वाड्रा उस पर दस्तखत करते हैं । ईडी के समक्ष दिए बयान, अदालत में सुबूत के तौर पर देखे जाते हैं, इसी वजह से आरोपित से खुद लिखवाकर इन पर दस्‍तखत करवाए जाते हैं ।