आसान होता जा रहा है बीजेपी का मिशन 74 प्लस, ट्रंप कार्ड ने बिगाड़ दिया सपा-बसपा का खेल

अमित शाह ने यूपी के लिये मिशन 74 प्लस बनाया है, अब तक तो ये काफी मुश्किल माना जा रहा था, लेकिन प्रियंका गांधी की एंट्री ने यूपी के राजनीतिक समीकरण बदल दिये हैं।

New Delhi, Mar 17 : लोकसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने अपनी बहन प्रियंका गांधी वाड्रा को आगे कर सबसे बड़ा दांव खेला है, राजनीति में प्रियंका की एंट्री यूपी के सियासी समीकरण को एक बार फिर से उलझा दिया है, अब तक उत्तर प्रदेश में बीजेपी और सपा-बसपा गठबंधन के बीच सीधी टक्कर मानी जा रही थी, लेकिन प्रियंका गांधी की एंट्री ने मुकाबला त्रिकोणीय बना दिया है।

बीजेपी को फायदा मिलेगा
प्रियंका गांधी के सक्रिय राजनीति में उतरने के बाद से हर कोई एक ही सवाल कर रहा है, कि क्या मजबूत दावेदारी पेश करने से बीजेपी को फायदा मिलेगा, क्या कांग्रेस के इस दांव से सपा-बसपा को नुकसान होगा, क्या दलित और मुस्लिम वोट बैंक के लिये प्रियंका गांधी को आगे लाया गया है, अगर कुछ सियासी समीकरणों पर नजर दौड़ाएं, तो हालात ऐसे बनते दिख रहे हैं, जिससे बीजेपी को फायदा मिलता दिख रहा है।

दलित और मुस्लिम पर नजर
यूपी में कांग्रेस का फोकस दलित और मुस्लिम वोट बैंक पर है, जो अब तक बसपा का आधार वोट बैंक माना जाता रहा है, हालांकि पिछले कुछ चुनावों से बीजेपी ने इसमें सेंधमारी की है, अब दलित और ओबीसी को साधने के लिये कांग्रेस ने खास प्लान बनाया है, कहा जा रहा है कि प्रियंका को आगे लाने का मकसद ही यही है।

वोटकटवा पार्टी बन जाएगी कांग्रेस
यूपी में कांग्रेस के पास ना तो संगठन है और ना ही अब तक चेहरा था, लेकिन प्रियंका गांधी के आगे आने से वोटरों को लुभाने वाला एक बड़ा चेहरा पार्टी के पास है, लेकिन राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है, प्रियंका के आने से कांग्रेस को निश्चित रुप से फायदा होगा, लेकिन संगठन ना होने की वजह से पार्टी वोटकटवा पार्टी बनकर रह जाएगी, इसका सीधा बीजेपी बीजेपी को होगा, क्योंकि गैर -बीजेपी वोटों का बंटवारा होगा, इससे नुकसान सपा-बसपा को होगा।

मिशन 74 प्लस
आपको बता दें कि अमित शाह ने यूपी के लिये मिशन 74 प्लस बनाया है, अब तक तो ये काफी मुश्किल माना जा रहा था, लेकिन प्रियंका गांधी की एंट्री ने यूपी के राजनीतिक समीकरण बदल दिये हैं, कहा जा रहा है कि प्रियंका के कैम्पेन मोड में अखिलेश-माया परेशान हैं, वो भी लगातार अपनी रणनीति बदल रहे हैं।