विश्वकप से पहले विजय शंकर ने बयां किया दर्द, बताया ये है दुश्मन नंबर वन, एक पारी ने बदल दिया जीवन

विजय शंकर ने कहा कि मैं निश्चित तौर पर कहूंगा, कि निदाहास ट्रॉफी एक क्रिकेटर के तौर पर मेरे लिये जीवन बदलने वाला पल था।

New Delhi, May 16 : टीम इंडिया के हरफनमौला क्रिकेटर विजय शंकर अपने सामने नंबर चार बल्लेबाजी क्रम को लेकर बहस होते देख रहे हैं, कई पूर्व दिग्गज क्रिकेटरों और क्रिकेट पंडितों का मानना है कि इस नंबर पर युवा बल्लेबाज ऋषभ पंत और अंबाती रायडू अच्छे विकल्प हो सकते थे, लेकिन बीसीसीआई के पांच सदस्यों की चयन समिति ने इन दोनों को नकारते हुए विश्वकप टीम में विजय शंकर को मौका दिया है।

इस पारी ने बना दिया विलेन
विजय शंकर का विवादों से पुराना नाता रहा है, इतिहास गवाह है कि विजय और विवाद साथ-साथ चलते हैं, शायद आपने भी निदाहास ट्रॉफी का फाइनल मैच नहीं भूला होगा, जहां विजय शंकर अहम समय पर रन ना बनाने की वजह से विलेन बन गये थे, तब इस ऑलराउंडर ने 19 गेंदों 17 रन बनाये थे, हालांकि दिनेश कार्तिक ने अंतिम गेंद पर छक्का लगाकर टीम को जीत दिला दी थी, लेकिन विजय शंकर के सामने बार-बार वो पारी भूत बनकर खड़ा हो जाता है, हालांकि काले बादलों के बाद धूप निखर कर सामने आता है, यही शंकर के साथ भी हुआ।

पहली बार मिला था बल्लेबाजी का मौका
एक न्यूज एजेंसी से बात करते हुए विजय शंकर ने बताया कि उस वाकये ने उन्हें जीवन का अहम पाठ पढाया, एक मजबूत इंसान बनाया, जो ये समझ सके, कि मौजूदा पल का लुत्फ कैसे उठाया जाता है, क्रिकेट के मैदान पर ज्यादा प्रेशर नहीं लेना चाहिये, उन्होने बताया कि ज्यादातर लोगों को ये भी मालूम नहीं है, कि फाइनल में ही मुझे पहली बार अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में बल्लेबाजी का मौका मिला था।

सोशल मीडिया दुश्मन
विजय शंकर ने कहा कि मैं निश्चित तौर पर कहूंगा, कि निदाहास ट्रॉफी एक क्रिकेटर के तौर पर मेरे लिये जीवन बदलने वाला पल था, उस बात को एक साल से ज्यादा हो चुका है, हर कोई जानता है, कि क्या हुआ था और कितना मुश्किल था, मीडिया के लोग मुझे फोन कर रहे थे और वही सवाल पूछ रहे थे, सोशल मीडिया मेरे लिये मुसीबत बन गया था, मैं थोड़ा निराश हो गया था, उससे निकलने में मुझे समय लगा।

एक मैच ने बदला जीवन
हरफनमौला क्रिकेटर ने कहा कि दूसरी ओर इन चीजों ने मुझे सिखाया कि इस तरह की स्थिति को कैसे संभालना है, किस तरह से इससे बाहर आना है, इस वाकये ने मुझे बताया कि एक दिन खराब होने का मतलब ये नहीं है कि विश्व का अंत हो गया, ये सिर्फ मेरे साथ ही नहीं हुआ, बल्कि बीते सालों में कई शीर्ष खिलाड़ियों के साथ भी ऐसा हो चुका है।