2 मिनट में जानिए, आज सुप्रीम कोर्ट में क्‍या–क्‍या हुआ, 500 साल पुराने विवाद का ‘आखिरी फैसला’

अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने अपना ऐतिहासिक फैसला सुना दिया है । आगे पढ़ें सुबह साढ़े 10 बजे से लेकर फैसला पढ़े जाने तक कोर्ट में क्‍या-क्‍या हुआ ।

New Delhi, Nov 09: 500 साल पुराने अयोध्‍या राम मंदिर विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने आज अपना ऐतिहासिक फैसला सुना दिया है । सुप्रीम कोर्ट ने मामले में रामलला के हक में फैसला सुनाते हुए विवादित जमीन पर मंदिर निर्माण का आदेश केन्‍द्र को दे दिया है, साथ ही मुस्लिम समाज को भी मंदिर निर्माण के लिए जमीन देने की बात कही है । सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले में विवादित जमीन राम जन्मभूमि न्यास को देने का फैसला किया है । यानी स्‍पष्‍ट है कि विवादित जमीन राम मंदिर के लिए दे दी गई है । जबकि मुस्लिम पक्ष को अलग स्थान पर जगह देने के लिए कहा गया है । कोर्ट में सुबह साढ़े 10 बजे से क्‍या – कया हुआ आइए आपको बताते हैं ।

5 जजों की बेंच ने सुनाया फैसला
चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्‍यक्षता वाली 5 बेंच की पीठ ने ये फैसला सर्व सम्‍मति से सुनाया । राम मंदिर निर्माण के लिए सुबह कोर्ट पहुंचे जजों ने सबसे पहले फैसले की कॉपी पर दस्‍तखत किए । कोर्ट के इस फैसले के लिए कोर्ट रूम वकीलों से खचाखच भरा हुआ था । चीफ जस्टिस ने फैसला पढ़ना शुरू किया और कहा कि 1949 में मूर्तियां रखी गईं थीं । कोर्ट ने कहा कि निर्मोही अखाड़े का दावा लिमिटेशन से बाहर है, निर्मोही अखाड़े का दावा खारिज कर दिया गया । साथ ही शिया वक्‍फ बोर्ड का दावा भी खारिज कर दिया गया ।

खाली जमीन पर नहीं बनाई गई मस्जिद
कोर्ट ने ASI रिपोर्ट के आधार पर फैसला सुनाते हुए कहा मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाने की भी पुख्ता जानकारी नहीं है । कोर्ट ने कहा कि आस्था के आधार पर जमीन का मालिकाना हक नहीं दिया जा सकता, फैसला कानून के आधार पर ही दिया जाएगा । कोर्ट ने कहा कि मुस्लिम पक्ष जमीन पर दावा साबित करने में नाकाम रहा है । कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष को वैकल्पिक जमीन देने का आदेश दिया । यानी सुन्नी वक्फ बोर्ड को अयोध्या में ही दूसरी जगह जमीन देने का आदेश दिया है । कोर्ट ने विवादित जमीन का हक राम जन्मभूमि न्यास को दिया ।

3 महीने में ट्रस्‍ट बनाए सरकार
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि विवादित जमीन पर रामजन्मभूमि न्यास का हक है । जबकि मुस्लिम पक्ष को अयोध्या में ही 5 एकड़ जमीन किसी दूसरी जगह दे दी जाएगी । कोर्ट ने ये भी कहा कि केंद्र या राज्य सरकार अयोध्या में उचित स्थान पर मस्जिद बनाने को जमीन दे । साथ केंद्र सरकार तीन महीने में स्कीम लाए और ट्रस्ट बनाए । यह ट्रस्ट राम मंदिर का निर्माण करेगा । वहीं मुस्लिम पक्ष के वकील जफरयाब जिलानी ने कहा कि हम कोर्ट के फैसले का सम्मान करते हैं, लेकिन फैसले में कई विरोधाभास है, लिहाजा हम फैसले से संतुष्ट नहीं है । उन्होंने ये भी कहा कि हम फैसले का मूल्यांकन करेंगे और आगे की कार्रवाई पर फैसला लेंगे ।